vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 323: व्यासजीकी पुत्रप्राप्तिके लिये तपस्या और भगवान् शंकरसे वरप्राप्ति
»
श्लोक 23
श्लोक
12.323.23
जटाश्च तेजसा तस्य वैश्वानरशिखोपमा:।
प्रज्वलन्त्य: स्म दृश्यन्ते युक्तस्यामिततेजस:॥ २३॥
अनुवाद
योग से युक्त अमित तेजस्वी व्यासजी की जटाएँ उनके तेज के कारण अग्नि की लपटों के समान दिख रही थीं॥23॥
Amit Tejasvi Vyasji's locks, which were connected to Yoga, looked like flames of fire due to his brilliance. 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×