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mahabharat 12.323.16: शक्तिशाली व्यास ने सौ वर्षों तक केवल वायु का सेवन किया और अनेक रूप वाले भगवान शिव की आराधना में तत्पर रहे ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.323: व्यासजीकी पुत्रप्राप्तिके लिये तपस्या और भगवान् शंकरसे वरप्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 323: व्यासजीकी पुत्रप्राप्तिके लिये तपस्या और भगवान् शंकरसे वरप्राप्ति  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.323.16 
अतिष्ठन्मारुताहार: शतं किल समा: प्रभु:।
आराधयन्महादेवं बहुरूपमुमापतिम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
शक्तिशाली व्यास ने सौ वर्षों तक केवल वायु का सेवन किया और अनेक रूप वाले भगवान शिव की आराधना में तत्पर रहे ॥16॥
 
The powerful Vyasa consumed only air for a hundred years and was devoted to the worship of Lord Shiva who had many forms. ॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)