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mahabharat 12.323.14: उन्होंने यह निश्चय करके तपस्या आरम्भ की कि मुझे ऐसा पुत्र मिले जो अग्नि, पृथ्वी, जल, वायु या आकाश के समान धैर्यवान हो॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.323: व्यासजीकी पुत्रप्राप्तिके लिये तपस्या और भगवान् शंकरसे वरप्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 323: व्यासजीकी पुत्रप्राप्तिके लिये तपस्या और भगवान् शंकरसे वरप्राप्ति  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.323.14 
अग्नेर्भूमेरपां वायोरन्तरिक्षस्य वा विभो।
धैर्येण सम्मित: पुत्रो मम भूयादिति स्म ह॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने यह निश्चय करके तपस्या आरम्भ की कि मुझे ऐसा पुत्र मिले जो अग्नि, पृथ्वी, जल, वायु या आकाश के समान धैर्यवान हो॥14॥
 
He began performing tapasya with the resolve that he should get a son who would be as patient as the fire, earth, water, air or sky.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)