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mahabharat 12.323.13: कुरुश्रेष्ठ! योग के उपासक व्यासजी योग के द्वारा भगवान् में मन लगाकर तपका अनुष्ठान करते थे। उनकी तपस्या का उद्देश्य पुत्र प्राप्ति था। 13॥   |   mahabharat अध्याय 12.323: व्यासजीकी पुत्रप्राप्तिके लिये तपस्या और भगवान् शंकरसे वरप्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 323: व्यासजीकी पुत्रप्राप्तिके लिये तपस्या और भगवान् शंकरसे वरप्राप्ति  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.323.13 
योगेनात्मानमाविश्य योगधर्मपरायण:।
धारयन् स तपस्तेपे पुत्रार्थं कुरुसत्तम॥ १३॥
 
 
अनुवाद
कुरुश्रेष्ठ! योग के उपासक व्यासजी योग के द्वारा भगवान् में मन लगाकर तपका अनुष्ठान करते थे। उनकी तपस्या का उद्देश्य पुत्र प्राप्ति था। 13॥
 
Kurushrestha! Vyas, a devotee of Yoga, used to perform Tapaka ritual by concentrating his mind on God through Yoga. The purpose of his penance was to have a son. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)