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अत्र ते वर्तयिष्यामि जन्मयोगफलं तथा।
शुकस्याग्रॺं गतिं चैव दुर्विदामकृतात्मभि:॥ १०॥
अनुवाद
राजन! मैं आपसे शुकदेवजी के जन्म की कथा, उनके योगफल और उनके उत्तम भाग्य के बारे में कह रहा हूँ, जिसे अजेय जीव भी नहीं समझ सकते॥10॥
King! I am telling you the story of Shukdev's birth, the results of his yoga, and his excellent fate, which even the unconquered souls cannot understand.॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥