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mahabharat 12.323.1: युधिष्ठिर बोले, "पितामह! महान तपस्वी एवं पुण्यात्मा शुकदेवजी व्यासजी के यहाँ कैसे उत्पन्न हुए? और उन्होंने किस प्रकार परम सिद्धि प्राप्त की? कृपया मुझे यह बताइए।"   |   mahabharat अध्याय 12.323: व्यासजीकी पुत्रप्राप्तिके लिये तपस्या और भगवान् शंकरसे वरप्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 323: व्यासजीकी पुत्रप्राप्तिके लिये तपस्या और भगवान् शंकरसे वरप्राप्ति  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.323.1 
युधिष्ठिर उवाच
कथं व्यासस्य धर्मात्मा शुको जज्ञे महातपा:।
सिद्धिं च परमां प्राप्तस्तन्मे ब्रूहि पितामह॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "पितामह! महान तपस्वी एवं पुण्यात्मा शुकदेवजी व्यासजी के यहाँ कैसे उत्पन्न हुए? और उन्होंने किस प्रकार परम सिद्धि प्राप्त की? कृपया मुझे यह बताइए।"
 
Yudhishthira said, "Grandfather! How was the great ascetic and virtuous Shukdevji born to Vyasa? And how did he achieve supreme success? Please tell me this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)