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mahabharat 12.322.5: राजा नास्तिक लोगों के हाथों में हथकड़ियाँ डालकर उन्हें राज्य से निकाल देता है और वे उन वनों में चले जाते हैं जो उन्मत्त हाथियों के कारण दुर्गम हैं तथा साँपों और चोरों आदि के भय से भरे हुए हैं। इससे बढ़कर उन्हें और क्या दण्ड मिल सकता है?॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.322: शुभाशुभ कर्मोंका परिणाम कर्ताको अवश्य भोगना पड़ता है, इसका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 322: शुभाशुभ कर्मोंका परिणाम कर्ताको अवश्य भोगना पड़ता है, इसका प्रतिपादन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.322.5 
व्यालकुञ्जरदुर्गेषु सर्पचौरभयेषु च।
हस्तावापेन गच्छन्ति नास्तिका: किमत: परम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
राजा नास्तिक लोगों के हाथों में हथकड़ियाँ डालकर उन्हें राज्य से निकाल देता है और वे उन वनों में चले जाते हैं जो उन्मत्त हाथियों के कारण दुर्गम हैं तथा साँपों और चोरों आदि के भय से भरे हुए हैं। इससे बढ़कर उन्हें और क्या दण्ड मिल सकता है?॥5॥
 
The king puts handcuffs on the hands of atheist people and banishes them from the kingdom and they go to those forests which are inaccessible due to mad elephants and are filled with fear of snakes and thieves etc. What more punishment can they get than this?॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)