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mahabharat 12.322.4: जो लोग धर्मपरायण, ऐश्वर्यवान, धनवान और सत्कर्मों में तत्पर रहते हैं, वे उत्सवों से भी अधिक उत्सव, स्वर्ग से भी अधिक स्वर्ग और सुखों से भी अधिक सुख प्राप्त करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.322: शुभाशुभ कर्मोंका परिणाम कर्ताको अवश्य भोगना पड़ता है, इसका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 322: शुभाशुभ कर्मोंका परिणाम कर्ताको अवश्य भोगना पड़ता है, इसका प्रतिपादन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.322.4 
उत्सवादुत्सवं यान्ति स्वर्गात् स्वर्गं सुखात् सुखम्।
श्रद्दधानाश्च दान्ताश्च धनस्था: शुभकारिण:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जो लोग धर्मपरायण, ऐश्वर्यवान, धनवान और सत्कर्मों में तत्पर रहते हैं, वे उत्सवों से भी अधिक उत्सव, स्वर्ग से भी अधिक स्वर्ग और सुखों से भी अधिक सुख प्राप्त करते हैं।
 
Those who are devout, possessive, wealthy and devoted to good deeds, attain more festivals than festivals, more heaven than heaven and more happiness than happiness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)