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mahabharat 12.322.2: भीष्म बोले, "हे राजन! जब बुद्धि काम और क्रोध आदि दुर्गुणों से युक्त हो जाती है, तब उनसे प्रेरित होकर मनुष्य का मन पापों में लिप्त होने लगता है। तब वह मनुष्य सदोष कर्म करके महान् क्लेशों में पड़ जाता है॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 12.322: शुभाशुभ कर्मोंका परिणाम कर्ताको अवश्य भोगना पड़ता है, इसका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 322: शुभाशुभ कर्मोंका परिणाम कर्ताको अवश्य भोगना पड़ता है, इसका प्रतिपादन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.322.2 
भीष्म उवाच
आत्मनानर्थयुक्तेन पापे निविशते मन:।
स कर्म कलुषं कृत्वा क्लेशे महति धीयते॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "हे राजन! जब बुद्धि काम और क्रोध आदि दुर्गुणों से युक्त हो जाती है, तब उनसे प्रेरित होकर मनुष्य का मन पापों में लिप्त होने लगता है। तब वह मनुष्य सदोष कर्म करके महान् क्लेशों में पड़ जाता है॥ 2॥
 
Bhishma said, "O King! When the intellect is filled with evils like lust and anger, then the mind of the person inspired by them starts indulging in sins. Then that person commits faulty deeds and falls into great troubles.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)