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mahabharat 12.322.19: जैसे आकाश में पक्षियों के या जल में मछलियों के पदचिह्न नहीं देखे जा सकते, वैसे ही पुण्यात्मा और बुद्धिमान पुरुषों का भाग्य नहीं जाना जा सकता ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 12.322: शुभाशुभ कर्मोंका परिणाम कर्ताको अवश्य भोगना पड़ता है, इसका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 322: शुभाशुभ कर्मोंका परिणाम कर्ताको अवश्य भोगना पड़ता है, इसका प्रतिपादन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.322.19 
शकुनानामिवाकाशे मत्स्यानामिव चोदके।
पदं यथा न दृश्येत तथा पुण्यकृतां गति:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जैसे आकाश में पक्षियों के या जल में मछलियों के पदचिह्न नहीं देखे जा सकते, वैसे ही पुण्यात्मा और बुद्धिमान पुरुषों का भाग्य नहीं जाना जा सकता ॥19॥
 
Just as the footprints of birds in the sky or fish in water cannot be seen, similarly the fate of virtuous and wise men cannot be known. ॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)