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mahabharat 12.322.17: जैसे मैला कपड़ा जल में धोने से शुद्ध हो जाता है, वैसे ही जो मनुष्य उपवास सहित तप करते हैं (उनका अन्तःकरण शुद्ध हो जाता है) वे शाश्वत सुख को प्राप्त करते हैं ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.322: शुभाशुभ कर्मोंका परिणाम कर्ताको अवश्य भोगना पड़ता है, इसका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 322: शुभाशुभ कर्मोंका परिणाम कर्ताको अवश्य भोगना पड़ता है, इसका प्रतिपादन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.322.17 
मलिनं हि यथा वस्त्रं पश्चाच्छुद्धॺति वारिणा।
उपवासै: प्रतप्तानां दीर्घं सुखमनन्तकम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जैसे मैला कपड़ा जल में धोने से शुद्ध हो जाता है, वैसे ही जो मनुष्य उपवास सहित तप करते हैं (उनका अन्तःकरण शुद्ध हो जाता है) वे शाश्वत सुख को प्राप्त करते हैं ॥17॥
 
Just as a dirty cloth becomes pure after washing it in water, similarly those who perform austerities with fasting (their conscience becomes pure) attain eternal happiness. ॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)