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mahabharat 12.322.15: जो भी मनुष्य अच्छे या बुरे कर्म करता है, चाहे वह बालक हो, युवा हो या वृद्ध हो, वह प्रत्येक जन्म में उसी आयु में उन कर्मों का फल भोगता है ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.322: शुभाशुभ कर्मोंका परिणाम कर्ताको अवश्य भोगना पड़ता है, इसका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 322: शुभाशुभ कर्मोंका परिणाम कर्ताको अवश्य भोगना पड़ता है, इसका प्रतिपादन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.322.15 
बालो युवा वा वृद्धश्च यत् करोति शुभाशुभम्।
तस्यां तस्यामवस्थायां भुङ्‍क्ते जन्मनि जन्मनि॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जो भी मनुष्य अच्छे या बुरे कर्म करता है, चाहे वह बालक हो, युवा हो या वृद्ध हो, वह प्रत्येक जन्म में उसी आयु में उन कर्मों का फल भोगता है ॥15॥
 
Whatever good or bad deeds a person performs, be it a child, a young person or an old person, he reaps the fruits of those deeds in the same age in each birth. ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)