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mahabharat 12.322.11: अपने ही कर्मों का फल एक निधि के समान है, जो शास्त्रों के अनुसार सुरक्षित रखी जाती है। जब उचित समय आता है, तो यह जीव समूह अपने कर्मों के अनुसार ले लिया जाता है। ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.322: शुभाशुभ कर्मोंका परिणाम कर्ताको अवश्य भोगना पड़ता है, इसका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 322: शुभाशुभ कर्मोंका परिणाम कर्ताको अवश्य भोगना पड़ता है, इसका प्रतिपादन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.322.11 
स्वकर्मफलनिक्षेपं विधानपरिरक्षितम्।
भूतग्राममिमं काल: समन्तादपकर्षति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
अपने ही कर्मों का फल एक निधि के समान है, जो शास्त्रों के अनुसार सुरक्षित रखी जाती है। जब उचित समय आता है, तो यह जीव समूह अपने कर्मों के अनुसार ले लिया जाता है। ॥11॥
 
The fruits of one's own actions are like a treasure, which is kept safe according to the scriptures. When the opportune moment arrives, this group of living beings is taken away according to their actions. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)