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mahabharat 12.321.92: यह कालरूपी रसोइया सम्पूर्ण प्राणियों को बलपूर्वक पका रहा है। यह मास और ऋतु नामक कलछी से प्राणियों को घुमाता रहता है। सूर्य उसके लिए अग्नि का काम करता है और रात-दिन, जो कर्मफल के साक्षी हैं, उसके लिए ईंधन हैं॥92॥   |   mahabharat अध्याय 12.321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  12.321.92 
मासर्तुसंज्ञापरिवर्तकेण
सूर्याग्निना रात्रिदिवेन्धनेन।
स्वकर्मनिष्ठाफलसाक्षिकेण
भूतानि काल: पचति प्रसह्य॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
यह कालरूपी रसोइया सम्पूर्ण प्राणियों को बलपूर्वक पका रहा है। यह मास और ऋतु नामक कलछी से प्राणियों को घुमाता रहता है। सूर्य उसके लिए अग्नि का काम करता है और रात-दिन, जो कर्मफल के साक्षी हैं, उसके लिए ईंधन हैं॥92॥
 
This cook in the form of time is forcefully cooking all the living beings. He keeps turning the living beings with the ladle named month and season. The sun serves as fire for him and the night and day, which are witnesses of the results of actions, are fuel for him.॥92॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)