Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.321.9: तेरे जीवन के दिन गिने जा रहे हैं। तेरा जीवन छोटा होता जा रहा है और ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो तेरा जीवन कहीं लिखा जा रहा है (समाप्त हो रहा है)। फिर तू उठकर भाग क्यों नहीं जाता? (जल्दी से अपना कर्तव्य पालन क्यों नहीं आरम्भ कर देता?)॥9॥ | mahabharat अध्याय 12.321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अह:सु गण्यमानेषु क्षीयमाणे तथाऽऽयुषि।
जीविते लिख्यमाने च किमुत्थाय न धावसि॥ ९॥
अनुवाद
तेरे जीवन के दिन गिने जा रहे हैं। तेरा जीवन छोटा होता जा रहा है और ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो तेरा जीवन कहीं लिखा जा रहा है (समाप्त हो रहा है)। फिर तू उठकर भाग क्यों नहीं जाता? (जल्दी से अपना कर्तव्य पालन क्यों नहीं आरम्भ कर देता?)॥9॥
The days of your life are being counted. Your life is getting shorter and it seems as if your life is being written somewhere (is ending). Then why don't you get up and run? (Why don't you quickly start performing your duties?)॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥