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mahabharat 12.321.81: जिसकी बुद्धि स्वर्ग के मार्ग पर चलती है और कभी धर्म का उल्लंघन नहीं करती, वह पुण्यात्मा कहलाता है। वह अपने बच्चों और सम्बन्धियों के लिए कभी दुःख का कारण नहीं बनता। 81.   |   mahabharat अध्याय 12.321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  12.321.81 
यस्य नोत्क्रामति मति: स्वर्गमार्गानुसारिणी।
तमाहु: पुण्यकर्माणमशोच्यं पुत्रबान्धवै:॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
जिसकी बुद्धि स्वर्ग के मार्ग पर चलती है और कभी धर्म का उल्लंघन नहीं करती, वह पुण्यात्मा कहलाता है। वह अपने बच्चों और सम्बन्धियों के लिए कभी दुःख का कारण नहीं बनता। 81.
 
A person whose intellect follows the path of heaven and never violates Dharma is called a virtuous soul. He is never a cause of sorrow for his children and relatives. 81.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)