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श्लोक 12.321.76  |
एवमभ्याहते लोके कालेनोपनिपीडिते।
सुमहद् धैर्यमालम्ब्य धर्मं सर्वात्मना कुरु॥ ७६॥ |
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| अनुवाद |
| जब सम्पूर्ण जगत् काल के द्वारा दुःखित और पीड़ित हो रहा हो, तब तुम्हें बड़े धैर्य का आश्रय लेकर सम्पूर्ण मन से धर्म का आचरण करना चाहिए ॥ 76॥ |
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| When the entire world is being hurt and afflicted by time, then you should take refuge in great patience and practice Dharma with all your heart. ॥ 76॥ |
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