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mahabharat 12.321.76: जब सम्पूर्ण जगत् काल के द्वारा दुःखित और पीड़ित हो रहा हो, तब तुम्हें बड़े धैर्य का आश्रय लेकर सम्पूर्ण मन से धर्म का आचरण करना चाहिए ॥ 76॥   |   mahabharat अध्याय 12.321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  12.321.76 
एवमभ्याहते लोके कालेनोपनिपीडिते।
सुमहद् धैर्यमालम्ब्य धर्मं सर्वात्मना कुरु॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
जब सम्पूर्ण जगत् काल के द्वारा दुःखित और पीड़ित हो रहा हो, तब तुम्हें बड़े धैर्य का आश्रय लेकर सम्पूर्ण मन से धर्म का आचरण करना चाहिए ॥ 76॥
 
When the entire world is being hurt and afflicted by time, then you should take refuge in great patience and practice Dharma with all your heart. ॥ 76॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)