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mahabharat 12.321.70: यह ज्ञान उसी को सिखाया गया है जो सम्पूर्ण शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त कर लेता है और उसके अनुसार शुभ कर्मों में तत्पर रहता है; क्योंकि कृतज्ञ पुरुष को जो कुछ सिखाया जाता है, वह सफल होता है ॥70॥   |   mahabharat अध्याय 12.321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  12.321.70 
श्रुतं समस्तमश्नुते प्रकुर्वत: शुभा: क्रिया:।
तदेतदर्थदर्शनं कृतज्ञमर्थसंहितम्॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
यह ज्ञान उसी को सिखाया गया है जो सम्पूर्ण शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त कर लेता है और उसके अनुसार शुभ कर्मों में तत्पर रहता है; क्योंकि कृतज्ञ पुरुष को जो कुछ सिखाया जाता है, वह सफल होता है ॥70॥
 
This knowledge has been taught to the one who acquires the knowledge of all the scriptures and remains engaged in performing auspicious deeds accordingly; because whatever is taught to a grateful person is successful. ॥ 70॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)