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श्लोक 12.321.69  |
दधाति य: स्वकर्मणा ददाति यस्य कस्यचित्।
अबुद्धिमोहजैर्गुणै: स एक एव युज्यते॥ ६९॥ |
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| अनुवाद |
| जो पुरुष अपने अच्छे कर्मों द्वारा धर्म के मार्ग पर चलता है और जिसे चाहे दान देता है, वही आसक्तिरहित मन से उत्पन्न होने वाले पुण्यों को प्राप्त करता है ॥69॥ |
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| He who follows the path of Dharma by his good deeds and gives charity to whomsoever he desires, he alone is blessed with the virtues which come from a mind free from attachments. ॥ 69॥ |
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