Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.321.67: सर्वशक्तिमान काल किसी पर भी स्नेह नहीं करता। वह मूल और कुल सहित समस्त सम्बन्धियों को ले जाता है। उसे रोकने वाला कोई नहीं है; इसलिए तुम्हें धर्म का संचय करना चाहिए। 67. | mahabharat अध्याय 12.321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सकूलमूलबान्धवं प्रभुर्हरत्यसङ्गवान्।
न सन्ति यस्य वारका: कुरुष्व धर्मसंनिधिम्॥ ६७॥
अनुवाद
सर्वशक्तिमान काल किसी पर भी स्नेह नहीं करता। वह मूल और कुल सहित समस्त सम्बन्धियों को ले जाता है। उसे रोकने वाला कोई नहीं है; इसलिए तुम्हें धर्म का संचय करना चाहिए। 67.
The all-powerful Kaal shows no affection towards anyone. He takes away all the relatives including the roots and the family. There is no one to stop him; therefore you should accumulate Dharma. 67.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥