श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  12.321.65 
यथा त्वमेव पृष्ठतस्त्वमग्रतो गमिष्यसि।
तथा गतिं गमिष्यत: किमात्मना परेण वा॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
जब तुम शरीर त्यागकर परलोक जाओगे, तब तुम ही पीछे रहोगे और तुम ही आगे रहोगे - तुम्हारे पीछे या आगे चलने वाला कोई नहीं होगा। ऐसी स्थिति में तुम्हें अपने या पराए किसी भी व्यक्ति से क्या लेना-देना?॥ 65॥
 
When you leave your body and go to the other world, you will be the one behind and you will be the one ahead - no one else will be there to follow or precede you. In such a situation, what do you have to do with any person, your own or a stranger?॥ 65॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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