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mahabharat 12.321.63: बेटा! तुम्हारे जीवन के चौबीस वर्ष बीत चुके हैं। अब तुम निश्चित रूप से पच्चीस वर्ष के हो; इसलिए पुण्य संचय करो। तुम्हारा सारा जीवन इसी प्रकार व्यतीत हो रहा है।   |   mahabharat अध्याय 12.321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  12.321.63 
गता त्रिरष्टवर्षता ध्रुवोऽसि पञ्चविंशक:।
कुरुष्व धर्मसंचयं वयो हि तेऽतिवर्तते॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
बेटा! तुम्हारे जीवन के चौबीस वर्ष बीत चुके हैं। अब तुम निश्चित रूप से पच्चीस वर्ष के हो; इसलिए पुण्य संचय करो। तुम्हारा सारा जीवन इसी प्रकार व्यतीत हो रहा है।
 
Son! Twenty-four years of your life have passed. Now you are certainly twenty-five years old; therefore accumulate virtue. Your whole life is passing away like this. 63.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)