Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.321.61: जो लोग गृहस्थ-धर्म की मर्यादा का पालन करते हैं, वे प्रजापति, बृहस्पति या इन्द्र के लोक में उत्तम गति को प्राप्त होते हैं ॥61॥   |   mahabharat अध्याय 12.321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  12.321.61 
प्रजापते: सलोकतां बृहस्पते: शतक्रतो:।
व्रजन्ति ते परां गतिं गृहस्थधर्मसेतुभि:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
जो लोग गृहस्थ-धर्म की मर्यादा का पालन करते हैं, वे प्रजापति, बृहस्पति या इन्द्र के लोक में उत्तम गति को प्राप्त होते हैं ॥61॥
 
People who follow the dignity of householder-dharma attain the best path in the world of Prajapati, Brihaspati or Indra. 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)