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mahabharat 12.321.60: इस लोक में पापरहित और पुण्यात्मा पुरुष जो-जो शुभ कर्म करते हैं, वे अगले जन्म में शुद्ध योनि में जन्म लेकर उन्हीं का फल भोगते हैं ॥60॥   |   mahabharat अध्याय 12.321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  12.321.60 
यथेह यत् कृतं शुभं विपाप्मभि: कृतात्मभि:।
तदाप्नुवन्ति मानवास्तथा विशुद्धयोनय:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
इस लोक में पापरहित और पुण्यात्मा पुरुष जो-जो शुभ कर्म करते हैं, वे अगले जन्म में शुद्ध योनि में जन्म लेकर उन्हीं का फल भोगते हैं ॥60॥
 
Whatever good deeds are done by sinless and virtuous men in this world, they reap the same fruits in their next life by being born in a pure womb. ॥ 60॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)