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mahabharat 12.321.56: दिन सब वस्तुओं को प्रकाशित करता है और रात्रि उन्हें छिपा देती है। वे सर्वव्यापी हैं और सब वस्तुओं का स्पर्श करते हैं, इसलिए इन घड़ियों में तुम्हें सदैव अपने धर्म का पालन करना चाहिए ॥ 56॥   |   mahabharat अध्याय 12.321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  12.321.56 
अहर्निशेषु सर्वत: स्पृशत्सु सर्वचारिषु।
प्रकाशगूढवृत्तिषु स्वधर्ममेव पालय॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
दिन सब वस्तुओं को प्रकाशित करता है और रात्रि उन्हें छिपा देती है। वे सर्वव्यापी हैं और सब वस्तुओं का स्पर्श करते हैं, इसलिए इन घड़ियों में तुम्हें सदैव अपने धर्म का पालन करना चाहिए ॥ 56॥
 
The day illuminates all things and the night hides them. They are omnipresent and touch all things, so you should always follow your Dharma during these hours. ॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)