Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.321.50: जब कोई जीवात्मा परलोक के मार्ग पर अकेला ही प्रस्थान करता है, उस संकट के समय उसकी माता, पुत्र, भाई, सम्बन्धी तथा अन्य प्रिय प्रियजन भी उसके साथ नहीं जाते ॥50॥ | mahabharat अध्याय 12.321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न मातृपुत्रबान्धवा न संस्तुत: प्रियो जन:।
अनुव्रजन्ति संकटे व्रजन्तमेकपातिनम्॥ ५०॥
अनुवाद
जब कोई जीवात्मा परलोक के मार्ग पर अकेला ही प्रस्थान करता है, उस संकट के समय उसकी माता, पुत्र, भाई, सम्बन्धी तथा अन्य प्रिय प्रियजन भी उसके साथ नहीं जाते ॥50॥
When a soul departs alone on the path to the other world, in that time of crisis even his mother, son, brothers and relatives and other admired loved ones do not accompany him. ॥ 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥