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mahabharat 12.321.5: सत्य, सरलता, अक्रोध, अनिष्ट विचारों का अभाव, इन्द्रिय संयम, तप, अहिंसा और दया आदि सिद्धांतों का उचित रीति से पालन करो ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.321.5 
सत्यमार्जवमक्रोधमनसूयां दमं तप:।
अहिंसां चानृशंस्यं च विधिवत् परिपालय॥ ५॥
 
 
अनुवाद
सत्य, सरलता, अक्रोध, अनिष्ट विचारों का अभाव, इन्द्रिय संयम, तप, अहिंसा और दया आदि सिद्धांतों का उचित रीति से पालन करो ॥5॥
 
Follow the principles of truth, simplicity, anger, absence of negative thoughts, control of senses, penance, non-violence and kindness etc. properly. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)