Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.321.43: इस मानव शरीर में वास करने वाले काम, क्रोध आदि भयंकर व्याघ्र तुम पर चारों ओर से आक्रमण कर रहे हैं; अतः तुम्हें पहले से ही पुण्य संचय करने का प्रयत्न करना चाहिए। | mahabharat अध्याय 12.321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुरा वृका भयंकरा मनुष्यदेहगोचरा:।
अभिद्रवन्ति सर्वतो यतस्व पुण्यशीलने॥ ४३॥
अनुवाद
इस मानव शरीर में वास करने वाले काम, क्रोध आदि भयंकर व्याघ्र तुम पर चारों ओर से आक्रमण कर रहे हैं; अतः तुम्हें पहले से ही पुण्य संचय करने का प्रयत्न करना चाहिए।
The fierce tigers of lust, anger, etc. residing in this human body are attacking you from all sides; therefore, you must make efforts to accumulate virtues beforehand.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥