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mahabharat 12.321.42: रोगरूपी सारथी काल अचानक ही तुम्हारे शरीर को फाड़ डालेगा; अतः इस जीवन का नाश होने से पहले ही तुम्हें महान तप करना चाहिए ॥ 42॥   |   mahabharat अध्याय 12.321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.321.42 
पुरा शरीरमन्तको भिनत्ति रोगसारथि:।
प्रसह्य जीवितक्षये तपो महत् समाचर॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
रोगरूपी सारथी काल अचानक ही तुम्हारे शरीर को फाड़ डालेगा; अतः इस जीवन का नाश होने से पहले ही तुम्हें महान तप करना चाहिए ॥ 42॥
 
Time, whose charioteer is disease, will suddenly tear apart your body; therefore, before this life is destroyed, you must perform great penance. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)