Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.321.4: व्यास ने कहा, "पुत्र, तुम्हें सदैव धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए और अपनी इन्द्रियों को वश में करके, अत्यधिक गर्मी, सर्दी, भूख और प्यास को सहन करके प्राणों पर विजय प्राप्त करनी चाहिए।" | mahabharat अध्याय 12.321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
व्यास उवाच
धर्मं पुत्र निषेवस्व सुतीक्ष्णौ च हिमातपौ।
क्षुत्पिपासे च वायुं च जय नित्यं जितेन्द्रिय:॥ ४॥
अनुवाद
व्यास ने कहा, "पुत्र, तुम्हें सदैव धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए और अपनी इन्द्रियों को वश में करके, अत्यधिक गर्मी, सर्दी, भूख और प्यास को सहन करके प्राणों पर विजय प्राप्त करनी चाहिए।"
Vyasa said, "Son, you should always follow the path of Dharma and by controlling your senses, endure the extreme heat, cold, hunger and thirst and gain victory over the breath of life."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥