Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.321.38: वह जीवन-विनाशक वायु जो पूर्वजन्म में तुम्हारे सामने बह रही थी, अब कहाँ है? अब भी जब मृत्यु का महान भय उपस्थित होगा, तब तुम सब दिशाओं को घूमते हुए देखोगे; इसलिए पहले से ही सावधान हो जाओ। 38। | mahabharat अध्याय 12.321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुरा स हि क्व एव ते प्रवाति मारुतोऽन्तक:।
पुरा च विभ्रमन्ति ते दिशो महाभयागमे॥ ३८॥
अनुवाद
वह जीवन-विनाशक वायु जो पूर्वजन्म में तुम्हारे सामने बह रही थी, अब कहाँ है? अब भी जब मृत्यु का महान भय उपस्थित होगा, तब तुम सब दिशाओं को घूमते हुए देखोगे; इसलिए पहले से ही सावधान हो जाओ। 38।
Where is the life-destroying wind that was blowing in front of you in your previous life? Even now, when the great fear of death presents itself, you will see all directions spinning; therefore, be cautious beforehand. 38.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥