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mahabharat 12.321.37: जब यमराज के आगे-आगे चलने वाली मृत्युरूपी भयंकर वायु चलने लगेगी, तब वह तुम्हें ही वहाँ ले जाएगी; इसलिए तुम्हें पहले से ही उस धर्म का आचरण करना चाहिए, जो परलोक में सुख देने वाला है ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 12.321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  12.321.37 
पुराऽभिवाति मारुतो यमस्य य: पुर:सर:।
पुरैक एव नीयसे कुरुष्व साम्परायिकम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
जब यमराज के आगे-आगे चलने वाली मृत्युरूपी भयंकर वायु चलने लगेगी, तब वह तुम्हें ही वहाँ ले जाएगी; इसलिए तुम्हें पहले से ही उस धर्म का आचरण करना चाहिए, जो परलोक में सुख देने वाला है ॥37॥
 
When the fierce wind of death, which moves ahead of Yamaraja, starts blowing, it will take you alone there; therefore, you should practice beforehand the Dharma which gives happiness in the next world. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)