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mahabharat 12.321.36: यमराज सबके स्वामी हैं। वे किसी का दुःख-दर्द नहीं समझते। वे तुम्हारे माता-पिता और सगे-संबंधियों सहित तुम्हारे प्राण भी ले जाएँगे। उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। इससे पहले कि वह समय आए, तुम्हें अपनी सुरक्षा का प्रबंध स्वयं कर लेना चाहिए। 36.   |   mahabharat अध्याय 12.321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.321.36 
पुरा समूलबान्धवं प्रभुर्हरत्यदु:खवित्।
तवेह जीवितं यमो न चास्ति तस्य वारक:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
यमराज सबके स्वामी हैं। वे किसी का दुःख-दर्द नहीं समझते। वे तुम्हारे माता-पिता और सगे-संबंधियों सहित तुम्हारे प्राण भी ले जाएँगे। उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। इससे पहले कि वह समय आए, तुम्हें अपनी सुरक्षा का प्रबंध स्वयं कर लेना चाहिए। 36.
 
Yamraj is the master of all. He does not understand anyone's pain and sorrow. He will take away your life along with your parents and relatives. There is no one to stop him. Before that time comes, you should make arrangements for your own safety. 36.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)