Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.321.29: परंतु जो लोग अपने गुरुजनों की आज्ञा का उल्लंघन करते हैं, उनके नरक में मरने के बाद भयानक शरीर वाले कुत्ते, लोहे के मुख वाले पक्षी, कौवे, गिद्ध आदि पक्षी तथा रक्त चूसने वाले कीड़े उनके सताए हुए शरीरों पर आक्रमण करते हैं और उन्हें नोचते और काटते हैं ॥29॥   |   mahabharat अध्याय 12.321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.321.29 
श्वानो भीषणकाया अयोमुखानि वयांसि
बलगृध्रकुलपक्षिणां च संघा:।
नरकदने रुधिरपा गुरुवचन-
नुदमुपरतं विशसन्ति॥ २९॥
 
 
अनुवाद
परंतु जो लोग अपने गुरुजनों की आज्ञा का उल्लंघन करते हैं, उनके नरक में मरने के बाद भयानक शरीर वाले कुत्ते, लोहे के मुख वाले पक्षी, कौवे, गिद्ध आदि पक्षी तथा रक्त चूसने वाले कीड़े उनके सताए हुए शरीरों पर आक्रमण करते हैं और उन्हें नोचते और काटते हैं ॥29॥
 
But those who disobey the orders of their teachers, after their death in hell, dogs with horrible bodies, iron-faced birds, crows, vultures and other birds, as well as blood-sucking insects, attack their tortured bodies and scratch and bite them. ॥29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)