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mahabharat 12.321.21: यदि तुम्हें इस संसाररूपी अंधकार में प्रवेश करना है, तो अपने हाथ में धर्म-बुद्धि रूपी महान दीपक को सावधानी से धारण करो, जिसकी लौ धीरे-धीरे जल रही है ॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 12.321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.321.21 
क्रमश: संचितशिखो धर्मबुद्धिमयो महान्।
अन्धकारे प्रवेष्टव्यं दीपो यत्नेन धार्यताम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
यदि तुम्हें इस संसाररूपी अंधकार में प्रवेश करना है, तो अपने हाथ में धर्म-बुद्धि रूपी महान दीपक को सावधानी से धारण करो, जिसकी लौ धीरे-धीरे जल रही है ॥ 21॥
 
If you have to enter this darkness of the world, then carefully hold in your hand the great lamp of Dharma-wisdom, whose flame is gradually burning. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)