Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.321.19: मनुष्य चाहे खड़ा हो या सो रहा हो, मृत्यु उसे निरंतर खोजती रहती है। जब अचानक मृत्यु होने वाली हो, तो तुम इतने शांत और निश्चिंत होकर कैसे बैठ सकते हो?॥19॥ | mahabharat अध्याय 12.321: व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको वैराग्य और धर्मपूर्ण उपदेश देते हुए सावधान करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तिष्ठन्तं च शयानं च मृत्युरन्वेषते यदा।
निर्वृत्तिं लभते कस्मादकस्मान्मृत्युनाशित:॥ १९॥
अनुवाद
मनुष्य चाहे खड़ा हो या सो रहा हो, मृत्यु उसे निरंतर खोजती रहती है। जब अचानक मृत्यु होने वाली हो, तो तुम इतने शांत और निश्चिंत होकर कैसे बैठ सकते हो?॥19॥
Whether a man is standing or sleeping, death is constantly searching for him. When you are going to die suddenly, how can you sit so peacefully and carefree?॥19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥