Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.320.99-100h: इनमें से प्रत्येक इन्द्रिय को न तो अपने बारे में और न ही किसी अन्य इन्द्रिय के बारे में कोई ज्ञान है। आँख को अपने आँख होने का ज्ञान नहीं है। इसी प्रकार कान को भी अपने बारे में कुछ भी ज्ञान नहीं है। ॥99 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एकैकस्येह विज्ञानं नास्त्यात्मनि तथा परे॥ ९९॥
न वेद चक्षुश्चक्षुष्ट्वं श्रोत्रं नात्मनि वर्तते।
अनुवाद
इनमें से प्रत्येक इन्द्रिय को न तो अपने बारे में और न ही किसी अन्य इन्द्रिय के बारे में कोई ज्ञान है। आँख को अपने आँख होने का ज्ञान नहीं है। इसी प्रकार कान को भी अपने बारे में कुछ भी ज्ञान नहीं है। ॥99 1/2॥
Each of these senses has no knowledge of itself or of the other. The eye does not know its being an eye. Similarly, the ear also does not know anything about itself. ॥99 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥