श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  12.320.97 
यथा जतु च काष्ठं च पांसवश्चोदबिन्दव:।
संश्लिष्टानि तथा राजन् प्राणिनामिह सम्भव:॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जिस प्रकार लाख और धूल मिलकर लकड़ी में मिल जाते हैं तथा जल की बूँदें मिलकर एक हो जाती हैं, उसी प्रकार इस संसार में अनेक तत्त्वों के संयोग से जीव उत्पन्न होते हैं।
 
King! Just as lacquer and dust mix together with wood and water drops mix together, similarly, in this world, creatures are born from the union of many elements.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)