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mahabharat 12.320.96: महाराज! आपने मुझसे पूछा है कि आप कौन हैं, किसके हैं और कहाँ से आए हैं? अतः इसके उत्तर में मेरी बात ध्यानपूर्वक सुनिए। ॥96॥   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  12.320.96 
कासि कस्य कुतश्चेति त्वयाहमभिचोदिता।
तत्रोत्तरमिदं वाक्यं राजन्नेकमना: शृणु॥ ९६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आपने मुझसे पूछा है कि आप कौन हैं, किसके हैं और कहाँ से आए हैं? अतः इसके उत्तर में मेरी बात ध्यानपूर्वक सुनिए। ॥96॥
 
Maharaj! You asked me who you are, whose you are and where you have come from? So in answer to this, listen to my statement with full attention. ॥96॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)