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mahabharat 12.320.94: परंतु नरेश्वर! जो वक्ता अपने और श्रोता दोनों के लिए उपयुक्त विषय पर ही बोलता है, वही वास्तविक वक्ता है, दूसरा कोई नहीं ॥94॥   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  12.320.94 
यस्तु वक्ता द्वयोरर्थमविरुद्धं प्रभाषते।
श्रोतुश्चैवात्मनश्चैव स वक्ता नेतरो नृप॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
परंतु नरेश्वर! जो वक्ता अपने और श्रोता दोनों के लिए उपयुक्त विषय पर ही बोलता है, वही वास्तविक वक्ता है, दूसरा कोई नहीं ॥94॥
 
But Nareshwar! The speaker who speaks only on a topic that is suitable for both himself and the listener is the real speaker, not anyone else. 94॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)