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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना
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श्लोक 90
श्लोक
12.320.90
कामात् क्रोधाद् भयाल्लोभाद् दैन्याच्चानार्यकात् तथा।
ह्रीतोऽनुक्रोशतो मानान्न वक्ष्यामि कथंचन॥ ९०॥
अनुवाद
मैं काम, क्रोध, भय, लोभ, दरिद्रता, अधर्म, लज्जा, दया या अभिमान से कुछ भी नहीं बोलूँगा ॥90॥
I will not speak anything out of lust, anger, fear, greed, poverty, unrighteousness, shame, pity or pride. ॥90॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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