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mahabharat 12.320.9: दूसरों से कहे गए परब्रह्म की सूक्ष्म बातें सुनकर सुलभा के मन में यह संदेह उत्पन्न हुआ कि जो बातें उसने जनक के विषय में सुनी थीं, वे सत्य हैं या नहीं। जब उसके हृदय में यह संदेह उत्पन्न हुआ, तब राजा जनक से मिलने का संकल्प हुआ॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.320.9 
सातिसूक्ष्मां कथां श्रुत्वा तथ्यं नेति ससंशया।
दर्शने जातसंकल्पा जनकस्य बभूव ह॥ ९॥
 
 
अनुवाद
दूसरों से कहे गए परब्रह्म की सूक्ष्म बातें सुनकर सुलभा के मन में यह संदेह उत्पन्न हुआ कि जो बातें उसने जनक के विषय में सुनी थीं, वे सत्य हैं या नहीं। जब उसके हृदय में यह संदेह उत्पन्न हुआ, तब राजा जनक से मिलने का संकल्प हुआ॥9॥
 
Having heard the subtle talks of the Supreme Brahman spoken by him from others, Sulabha had a doubt in her mind whether the things she had heard about Janaka were true or not. When this doubt arose in her heart, the resolution of meeting King Janaka arose.॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)