Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.320.84: धर्म, अर्थ, काम और मोक्षके सम्बन्धमें किसी एक बातका विशेष रूपसे प्रतिपादन करनेकी प्रतिज्ञा करके और ‘यह अभीष्ट विषय है’ ऐसा कहकर प्रवचनके अन्तमें जो सिद्धान्त स्थापित किया जाता है, उसे निर्णय कहते हैं ॥84॥   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  12.320.84 
धर्मकामार्थमोक्षेषु प्रतिज्ञाय विशेषत:।
इदं तदिति वाक्यान्ते प्रोच्यते स विनिर्णय:॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
धर्म, अर्थ, काम और मोक्षके सम्बन्धमें किसी एक बातका विशेष रूपसे प्रतिपादन करनेकी प्रतिज्ञा करके और ‘यह अभीष्ट विषय है’ ऐसा कहकर प्रवचनके अन्तमें जो सिद्धान्त स्थापित किया जाता है, उसे निर्णय कहते हैं ॥84॥
 
The principle which is established at the end of the discourse by taking a pledge to specifically propound one thing regarding Dharma, Artha, Kama and Moksha and saying, 'This is the desired subject', is called decision. 84॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)