श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  12.320.83 
इदं पूर्वमिदं पश्चाद् वक्तव्यं यद् विवक्षितम्।
क्रमयोगं तमप्याहुर्वाक्यं वाक्यविदो जना:॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
गिनाए गए गुणों और दोषों में से किसी एक गुण या दोष का उल्लेख पहले और किसी दूसरे का बाद में करना चाहिए। इस प्रकार माने गए पूर्ववर्ती और परवर्ती अनुक्रम के क्रम को अनुक्रम कहते हैं और जिस वाक्य में ऐसा अनुक्रम हो, उसे विद्वान वाक्य विशेषज्ञ अनुक्रम कहते हैं।
 
Among the enumerated virtues and vices, a certain virtue or vice should be mentioned first and a certain other should be mentioned later. The order of the previous and subsequent sequence considered in this manner is called sequence and the sentence which has such sequence is called sequence by the learned sentence experts.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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