श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  12.320.81 
ज्ञानं ज्ञेयेषु भिन्नेषु यदा भेदेन वर्तते।
तत्रातिशायिनी बुद्धिस्तत् सौक्ष्म्यमिति वर्तते॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
जहाँ अनेक ज्ञेय अर्थ हों तथा जहाँ 'यह बर्तन है, यह कपड़ा है' आदि वस्तुओं का पृथक्-पृथक् ज्ञान हो, ऐसे स्थानों में उचित निर्णय करने वाली बुद्धि को सौक्ष्म्य कहते हैं। 81।
 
Where there are many different knowable meanings and where there is separate knowledge of things like 'this is a pot, this is a cloth', the intelligence that makes the right decision in such places is called Saukshmya. 81.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)