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mahabharat 12.320.8: सुलभा ने संसार भर में भ्रमण करते हुए अनेक स्थानों पर त्रिदण्डी संन्यासियों के मुख से मोक्ष ज्ञान के विषय में मिथिला के राजा जनक की प्रशंसा सुनी ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.320.8 
तया जगदिदं कृत्स्नमटन्त्या मिथिलेश्वर:।
तत्र तत्र श्रुतो मोक्षे कथ्यमानस्त्रिदण्डिभि:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
सुलभा ने संसार भर में भ्रमण करते हुए अनेक स्थानों पर त्रिदण्डी संन्यासियों के मुख से मोक्ष ज्ञान के विषय में मिथिला के राजा जनक की प्रशंसा सुनी ॥8॥
 
Wandering all over the world, Sulabha heard the praise of King Janak of Mithila regarding the knowledge of salvation from the mouth of Tridandi Sannyasis at many places. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)