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mahabharat 12.320.78-79: सुलभा बोली- राजन्! जो शब्द समूह वाणी और बुद्धि को दूषित करने वाले नौ दोषों से रहित, अठारह गुणों से युक्त और युक्तिसंगत अर्थ वाला हो, उसे वाक्य कहते हैं। उस वाक्य में पाँच प्रकार के अर्थ होने चाहिए- सौक्ष्म्य, सांख्य, आदेश, निर्णय और प्रयोजन ॥ 78-79॥   |   mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 78-79
 
 
श्लोक  12.320.78-79 
सुलभोवाच
नवभिर्नवभिश्चैव दोषैर्वाग्बुद्धिदूषणै:।
अपेतमुपपन्नार्थमष्टादशगुणान्वितम्॥ ७८॥
सौक्ष्म्यं सांख्यक्रमौ चोभौ निर्णय: सप्रयोजन:।
पञ्चैतान्यर्थजातानि वाक्यमित्युच्यते नृप॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
सुलभा बोली- राजन्! जो शब्द समूह वाणी और बुद्धि को दूषित करने वाले नौ दोषों से रहित, अठारह गुणों से युक्त और युक्तिसंगत अर्थ वाला हो, उसे वाक्य कहते हैं। उस वाक्य में पाँच प्रकार के अर्थ होने चाहिए- सौक्ष्म्य, सांख्य, आदेश, निर्णय और प्रयोजन ॥ 78-79॥
 
Sulabha said-King! A group of words that is free from the nine defects that pollute speech and intellect, is endowed with eighteen qualities and has a logical meaning is called a sentence. There should be five types of meanings in that sentence: Soukshmya, Sankhya, order, decision and purpose. 78-79॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)