श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  12.320.76 
भीष्म उवाच
इत्येतैरसुखैर्वाक्यैरयुक्तैरसमञ्जसै:।
प्रत्यादिष्टा नरेन्द्रेण सुलभा न व्यकम्पत॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! राजा जनक ने इन दुःखदायी, अयोग्य और अप्रासंगिक वचनों से सुलभा का अपमान किया, किन्तु फिर भी सुलभा के मन में तनिक भी चिन्ता नहीं हुई।
 
Bhishma says - Yudhishthira! King Janaka insulted her with these hurtful, unworthy and irrelevant words, but even then Sulabha was not disturbed in her mind at all. 76.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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