भीष्म उवाच
इत्येतैरसुखैर्वाक्यैरयुक्तैरसमञ्जसै:।
प्रत्यादिष्टा नरेन्द्रेण सुलभा न व्यकम्पत॥ ७६॥
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! राजा जनक ने इन दुःखदायी, अयोग्य और अप्रासंगिक वचनों से सुलभा का अपमान किया, किन्तु फिर भी सुलभा के मन में तनिक भी चिन्ता नहीं हुई।
Bhishma says - Yudhishthira! King Janaka insulted her with these hurtful, unworthy and irrelevant words, but even then Sulabha was not disturbed in her mind at all. 76.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥