श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  12.320.75 
सा त्वं जातिं श्रुतं वृत्तं भावं प्रकृतिमात्मन:।
कृत्यमागमने चैव वक्तुमर्हसि तत्त्वत:॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
अतः संन्यासिनी! तुम्हें उचित है कि तुम अपनी जाति, शास्त्रज्ञान, वर्ण, भाव, स्वभाव तथा यहाँ आने का प्रयोजन भी ठीक-ठीक बता दो॥75॥
 
So Sanyasini! It is appropriate for you to accurately tell your caste, knowledge of scriptures, character, intentions, nature and also the purpose of coming here. 75॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)