Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.320.69: जब स्त्री-पुरुष परस्पर प्रेम करते हैं, तब उनके मिलन का सुख अमृत के समान मधुर होता है। यदि प्रेम में पड़ी हुई स्त्री को वह पुरुष न मिले जिससे वह प्रेम करती है, तो वह दोष विष के समान भयंकर होता है ॥69॥ | mahabharat अध्याय 12.320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इच्छतोरत्र यो लाभ: स्त्रीपुंसोरमृतोपम:।
अलाभश्चापि रक्तस्य सोऽपि दोषो विषोपम:॥ ६९॥
अनुवाद
जब स्त्री-पुरुष परस्पर प्रेम करते हैं, तब उनके मिलन का सुख अमृत के समान मधुर होता है। यदि प्रेम में पड़ी हुई स्त्री को वह पुरुष न मिले जिससे वह प्रेम करती है, तो वह दोष विष के समान भयंकर होता है ॥69॥
When a man and a woman love each other, the happiness of union that they enjoy is as sweet as nectar. If a woman in love does not get the man she loves, then that flaw is as dangerous as poison. ॥ 69॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥